झारखंड के गुमला ज़िले के सिसकारी गांव में डायन-बिसाही के आरोप में चार लोगों की हत्या कर दी गई है. मरने
वालों में सुन्ना उरांव (60), चापा उरांव (69) उनकी पत्नी पीरा उराईन (60)
और फगनी उराईन (60) शामिल हैं.
घटना रविवार तड़के तीन बजे की है. शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने गांव के आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है. गिरफ्तार लोगों में गांव के पाहन (मुख्य पुजारी) सुकरा उरांव, पुजार (सहायक पुजारी) तुला उरांव, कुन्दरू उरांव, लालू उरांव, राम उरांव, शुकु उरांव, महावीर उरांव और झाड़ी उरांव शामिल हैं.
गुमला के एसपी अंजनी कुमार झा ने बताया कि मामला पूरी तरह अंधविश्वास का है. गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा-147 (उपद्रव का दोषी)-148 (घातक हथियार से हमला)-149 (भीड़ द्वारा हिंसा)-302 (हत्या) और डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम-2001 के तहत एफआईआर दर्ज करा दिया गया है.
कुछ अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज किया जाएगाउन्होंने यह भी बताया कि सिसकारी गांव के लोग जिस दूसरे गांव (मुर्गा) में ओझाइन (महिला ओझा) के पास पहले गए थे, वहां भी दे रही है. उन्हें जाँच के बादपुलिस दबिश गिरफ्तार किया जाएगा.
रांची ज़िला मुख्यालय से 94 किलोमीटर दूर नगर पंचायत के सिसकारी गांव में चारो तरफ़ सन्नाटा पसरा हुआ है. हत्या के बाद जिस जगह लाश रखी गई थी, वहां पुलिस का पहरा लगा दिया गया है.
सोमवार 22 जुलाई की दोपहर यहां पर ग्राम प्रधान मारवाड़ी उरांव (45), उप मुखिया रुक्मनी देवी के पति दामोदर सिंह कुछ अन्य सरकारी कर्मी मिले. उन्होंने बताया कि गांव में कुल 94 घर हैं. जिसमें 90 घर उरांव जनजाति के, लोहरा जनजाति के तीन और एक घर नागेसिया जनजाति का है.
उन्होंने यह भी बताया कि 31 जून को सीएम कृषि आशीर्वाद योजना के तहत जमा किए गए आंकड़े के मुताबिक़ मृतक चापा उरांव के पास छह एकड़ ज़मीन, सुना उरांव के पास चार एकड़ ज़मीन हैं. जबकि फगनी उराईन का रैयत पेपर नहीं मिला था, जिस वजह से पता नहीं चल पाया कि उसके पास कितनी ज़मीन हैं.
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में मात्र चार घर बनाए गए हैं. किसी भी घर में शौचालय नहीं है.
बीबीसी को गांववालों से मिली जानकारी के मुताबिक़ गांव के युवक बोलो उरांव और सरकारी शिक्षक नरुआ उरांव की पत्नी की मृत्यु एक महीना पहले बीमारी की वजह से हो गई थी. वहीं एक साल पहले गौरा उरांव की पत्नी की मृत्यु भी कई बीमारियों की वजह से हो गई थी.
बोलो उरांव को शराब की लत थी. वह पहले से भी बीमार थे. नरुआ उरांव की पत्नी को किडनी संबंधी बीमारी थी.
मारवाड़ी उरांव ने बताया कि मृतक सुना उरांव, चापा उरांव और पीरी देवी हर दिन चार बजे सुबह ज़ोर-ज़ोर से मंत्र पढ़कर पूजा करते थे. अगले ही पल उन्होंने यह भी बताया कि यह मंत्र नागपुरी भाषा में करमा गीत (आदिवासी त्योहार), सरना माई का गीत हुआ करता था. जिसे खास मौक़ों पर अन्य ग्रामीण भी सरना पूजा के वक़्त गाया करते हैं.
घटनाक्रम से बारे में उन्होंने बताया कि बीते 17 जुलाई को गांव में एक सभा का आयोजन किया गया था. जिसमें 200 से अधिक ग्रामीणों के साथ वह भी मौजूद थे. बात हुई कि गांव पर किसी की बुरी नज़र लग गई है. तय किया गया कि सावन महीने के सातवें दिन यानी 24 जुलाई को गांव की देवी को एक बकरे का बलि चढ़ाकर इसे शांत किया जाएगा.
इसके बाद कुछ ग्रामीण पास के गांव चडरी टोली के ओझा जटु उरांव के पास पहुंचे. उन्होंने बताया कि गांव के हालत गंभीर हैं. उनसे नहीं संभल सकता है. किसी बड़े ओझा को दिखाओ.
एक अन्य ग्रामीण ठुमैर देवी ने बताया कि जटु उरांव की सलाह के बाद शुक्रवार 19 जुलाई को 50 से अधिक ग्रामीण रांची ज़िले के बुढ़मू प्रखंड के मुर्गी गांव के एक ओझा के पास पहुंचे. वहीं तेतरी देवी ने बताया कि उनलोगों के साथ ग्रामीणों में मृतकों में एक फगनी देवी के अलावा अन्य तीन भी शामिल थे. यही नहीं चापा उरांव और पीरी देवी के बहु-बेटे भी शामिल थे.